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Electrical Power system in Hindi | बिजली कहाँ से आती है

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Electricity Generation



दोस्तों आज के आर्टिकल मैं हम जानेगे बिजली कैसे बनती है / How electricity generate in Hindi / बिजली उत्पन्न करने की विधि क्या है / what is the method of electricity generation in Hindi / What are the 5 main sources of electricity in Hindi / बिजली कैसे उत्पन्न होती है। आखिर हमारे घरों तक बिजली कैसे पहुँचती है। 


दोस्तो इसको हम तीन भागों में समझने की कोशिश करते हैं।

  1. Electric power generation
  2. Electric power transmission 
  3. Electric power distribution



How electricity generate in Hindi | बिजली  कहाँ से आती है | Electrical power system



Electric power generation in Hindi



दोस्तों जैसा की हम जानते हैं इलेक्ट्रिसिटी एक ऊर्जा है जिसको दूसरी ऊर्जा से उत्पन्न किया जाता है। यह मुक्त अवस्था मैं नहीं मिलती है इसको पैदा किया जाता है। जहाँ इसको पैदा किया जाता है उसको पावर स्टेशन या पावर प्लांट कहते हैं।


Voltage level at Power plant: 


सामान्यतः पावर का जनरेशन वोल्टेज के सन्दर्भ मैं किया जाता है जैसे जनरेटिंग स्टेशन मैं वोल्टेज उत्पादन की मात्रा 11000 Volt (11 KV) से 25000 Volt (25 KV) तक रखी जाती है। इस वोल्टेज को उपभोक्ता              तक ट्रांसमिट (भेजने) के लिए STEP-UP Transformer से और ज्यादा बढ़ाया जाता है। ताकि ट्रांसमिशन लाइन मैं हानियों को कम किया जा सके।  


Energy Source for Electrical Power system 


पावर प्लांट में साधारणतया Generator के द्वारा electricity को पैदा किया जाता है, Generator को घुमाने के लिए ऊर्जा की आवश्यकता होती है ये ऊर्जा कुछ ऊर्जा श्रोतों से ली जाती है जो की निचे दिए गए। हैं 

  1. ईंधन ऊर्जा (कोयला, पेट्रोलियम और प्राकृतिक गैसों  से)
  2. पानी की काइनेटिक ऊर्जा से 
  3. सोलर ऊर्जा
  4. पवन ऊर्जा
  5. नाभिकीय ऊर्जा 
  6. ज्वार-भाटा ऊर्जा
  7. भू-तापीय ऊर्जा  


उपर दिए गए सभी ऊर्जा श्रोत प्राथमिक ऊर्जा श्रोत हैं। जो की Conventional (परम्परागत) और Non-conventional (अपरंपरागत) ऊर्जा श्रोत हैं 

Conventional source(परम्परागत श्रोत): 

जैसा की नाम से ही स्पष्ट है पारम्परिक ऊर्जा श्रोत एक दिन समाप्त हो जाएँगी क्योकि ये सिमित मात्रा मैं उपलब्ध होते हैं। अर्थात ये रिन्यूएबल(Renewable) नहीं होते हैं। जैसे - कोयला, पेट्रोल-तेल, नेचुरल गैस आदि।  


Non-Conventional source(अपरम्परागत श्रोत): 

ये रिन्यूएबल ऊर्जा श्रोत होते हैं जो प्रदुषण भी कम करते हैं। जैसे- Solar energy, Water energy, Wind energy, Tidal energy(ज्वार-भाटा ऊर्जा) आदि। अतः इनको अपरंपरागत श्रोत भी कहते हैं।  




Electric power transmission in Hindi



जैसा की हम जानते हैं इलेक्ट्रिकल पावर को consumer तक पहुंचाने के लिए उसका ट्रांसमिशन होना जरूरी होता है। अतः इलेक्ट्रिकल पावर के जनरेशन के बाद पावर को ट्रांसमिशन लाइन (बिजली के तारों) के जरिये घरों तक पहुंचाया जाता है। यह अभी तक दो तरीकों से संभव है। 

ओवरहेड ट्रांसमिशन लाइन (Overhead transmission)

बिजली के टावर और पोल के जरिये यह ट्रांसमिशन किया जाता है। यह इकोनोमिकल(कम खर्चीला) ट्रांसमिशन होता है। 

अंडरग्राउंड ट्रांसमिशन लाइन (Underground transmission) 

बिजली के टावर और पोल की आवश्यकता नहीं होती लेकिन फिर भी यह ट्रांसमिशन Overhead transmission से महंगा पड़ता है।


Transmission Voltage in Transmission Line:


ट्रांसमिशन करने लिए हमेशा हाई वोल्टेज AC या DC का उपयोग किया जाता है। इसको क्रमश HVAC या HVDC ट्रांसमिशन कहते हैं। सामान्यतः ट्रांसमिशन 132KV, 110KV, 66KV, 33KV का होता है यदि ट्रांसमिशन अधिक दूरी का होता है तो ट्रांसमिशन वोल्टेज को और बढ़ाया जाता है। 

इसका सीधा संबंध लॉसेस (Electrical हानियाँ)  से होता है। जितना अधिक वोल्टेज को भेजेंगे उतना कम पावर मैं हानि होगी इसलिए हमेशा ट्रांसमिशन वोल्टेज को उच्च रखा जाता है। 




Electric power distribution in Hindi  



दोस्तों Electrical Power system का यह अंतिम भाग है जिसके बाद इलेक्ट्रिसिटी सीधे उपभोक्ता तक पंहुच जाती है। यहां से Electrical power को उपभोक्ता की मांगों के हिसाब से बांटा जाता है। 

Distributing substation और Distribution transformer: 


ट्रांसमिशन लाइन से हाई वोल्टेज इलेक्ट्रिकल पावर को Distribution transformer मैं लाया जाता है। और इस हाई वोल्टेज इलेक्ट्रिकल पावर को वापस  Step-down transformer से कम किया जाता है। 

वोल्टेज लेवल को पहले चरण मैं 11KV से 30KV तक किया जाता है जो की बड़े-बड़े उद्योगों  को दिया जाता है।
इन उपभोक्ताओं को प्राथमिक उपभोक्ता कहते हैं। 

 
अगले चरण मैं वोल्टेज लेवल को 120V से 440V तक किया जाता है इन उपभोक्ताओं को द्वितीयक उपभोक्ता कहते हैं। 

 

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